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शनिवार, 3 मार्च 2012

कबीर सोयी सूरमा, मन सूं मांदे झूझ

कबीर सोयी  सूरमा, मन सूं मांदे झूझ
पंच प्यादा पारी  ले, दूर करे सब दूज


अनुवाद :कबीर, वह अकेला योद्धा है, जो मन पर पूर्ण नियंत्रण पा  लेता है
            कामुक पांच इन्द्रियों को कुचल कर  सभी  द्वंद्व को हटा देता है

            अर्थ    : कबीर का कहना है कि वह ही  वास्तविक योद्धा जो मन के साथ संलग्न
                     रहते हुए भी उसपर संपूर्णतः पूर्ण रूप से  नियंत्रण रखता हो . वो  पांच
 सैनिकों (इन्द्रियों ) और सभी द्वंद्व को हटा. सकता है
केसन   कहा   बिगाडिया , जे  मुंडे    सौ  बार
मन  को कहे  ना मूंडिये  , जामें  विषे  विकार 


अनुवाद :   क्या नुकसान बालो  ने  किया है, जिसे बार-बार  उन्हें मुडाते रहते हो
                               क्यों न मन को मूंडिये  , जिसमे  अनियंत्रित, अनगिनत जहरीले विचार पैदा होते है

                                    अर्थ     : मन साफ - अधिक से अधिक शुद्ध, सकारात्मक और निस्वार्थ विचारो से मन को परिष्कृत करना .
कबीर माला  काठ  की , कहीं समझावे  तोही
मन ना फिरावे  आपना , कहा   फिरावे  मोहि


अनुवाद : कबीर, लकड़ी के मोतियों से  बनी ये  माला  , क्या तुम्हे  सिखा सकती  हैं?
                       यदि तुम्हे अपने मन की गति पर ही नियंत्रण नहीं है, तो मोती की गति का नियंत्रण क्यों?

अर्थ      :मोती नहीं मन पर नियंत्रण रखो.

मूंड मुंडावत दिन गए, अजहूँ ना मिलिया राम


                          मूंड मुंडावत  दिन गए, अजहूँ  ना मिलिया  राम
                          राम नाम कहू  क्या करे  , जे मन  के ओरे  काम


अनुवाद : सिर मुंडवाते युग  बीत चुके हैं अभी तक भगवान के साथ कोई मिलाप नहीं हुआ
             परमेश्वर के नाम का सस्वर पाठ व्यर्थ है, जब मन कुछ और  कर रहा है

अर्थ     : मन पर नियंत्रण - निरीक्षण