रविवार, 23 फ़रवरी 2014
Dilli Shehar Main (Folk Song) - Full Song, Tera Mera Vaada Official (+pl...
WE MUST PRODUCE THIS KIND OF ROCK TO SPREADS HARYANVI CULTURE ELL ARROUND THE WORLD
गुरुवार, 23 जनवरी 2014
चाणक्य सा कोई विद्वान कहाँ है
चाणक्य सा कोई विद्वान कहाँ है
भामाशाह सा कोई धनवान कहाँ है
बड़े बुजुर्ग की अच्छी भली सुनते थे
सुनने वाले वो कान कहाँ है
हरीश चंदर ने दिया दान में खुद को
दुनिया में अब वो दान कहाँ है
होता था शहीदों का जो मान कभी
शहीदों का अब वो मान कहाँ है
राज की शोभा में गाये थे
कभी कवियों के वो गुणगान कहाँ है
चुकाने में बिक जाती थी जमीं
अंग्रेजो का वो अब लगान कहाँ है
लगा रहता था कभी आना जाना
नामदेव ''तेरे वो मेहमान कहाँ है
#सोमबीरनामदेव
भामाशाह सा कोई धनवान कहाँ है
बड़े बुजुर्ग की अच्छी भली सुनते थे
सुनने वाले वो कान कहाँ है
हरीश चंदर ने दिया दान में खुद को
दुनिया में अब वो दान कहाँ है
होता था शहीदों का जो मान कभी
शहीदों का अब वो मान कहाँ है
राज की शोभा में गाये थे
कभी कवियों के वो गुणगान कहाँ है
चुकाने में बिक जाती थी जमीं
अंग्रेजो का वो अब लगान कहाँ है
लगा रहता था कभी आना जाना
नामदेव ''तेरे वो मेहमान कहाँ है
#सोमबीरनामदेव
कल कैसा भी था सोचता हूँ आज कैसा हो
कल कैसा भी था सोचता हूँ आज कैसा हो
हर जखम को भर सके वो इलाज कैसा हो
दे सके ऊँची सी एक उड़ान जो हौसलों को
सोचता हूँ आखिर वो पंख परवाज कैसा हो
पाल सकु बस सकून से जिन्दगी को यार
मेहनतकश सीधा साधा वो काज कैसा हो
गोली की आवाज से दूर शांति का होबसर
भाई चारे देता पैगाम वो नमाज कैसा हो
सात सुरों की मीठी तान हो जिसमे '''नामदेव '''
एकता की माला पिरोता हुआ साज कैसा हो
@sbsaroya #सोमबीरनामदेव
हर जखम को भर सके वो इलाज कैसा हो
दे सके ऊँची सी एक उड़ान जो हौसलों को
सोचता हूँ आखिर वो पंख परवाज कैसा हो
पाल सकु बस सकून से जिन्दगी को यार
मेहनतकश सीधा साधा वो काज कैसा हो
गोली की आवाज से दूर शांति का होबसर
भाई चारे देता पैगाम वो नमाज कैसा हो
सात सुरों की मीठी तान हो जिसमे '''नामदेव '''
एकता की माला पिरोता हुआ साज कैसा हो
@sbsaroya #सोमबीरनामदेव
माना मुझमें अब वो शराफत नही रही
माना मुझमें अब वो शराफत नही रही
सच बोलने की आप में आदत नहीं रही
भड़क उठते है क्यूँ छोटी छोटी बात पर
सच सुनने की आप में ताकत नही रही
आदमी तो आज भी वही हूँ मैं लेकिन
क्या हुआ जो मेरे पास दौलत नही रही
कभी नाचती तू इन उँगलियों पर मेरी
क्यूँ आज पहले सी मेरी हकूमत नही रही
जिन्दगी गुजार दी तेरे पीछे '' नामदेव ''
क्यूँ दिल में तेरे आज मुहबत नही रही
#सोमबीरनामदेव
सच बोलने की आप में आदत नहीं रही
भड़क उठते है क्यूँ छोटी छोटी बात पर
सच सुनने की आप में ताकत नही रही
आदमी तो आज भी वही हूँ मैं लेकिन
क्या हुआ जो मेरे पास दौलत नही रही
कभी नाचती तू इन उँगलियों पर मेरी
क्यूँ आज पहले सी मेरी हकूमत नही रही
जिन्दगी गुजार दी तेरे पीछे '' नामदेव ''
क्यूँ दिल में तेरे आज मुहबत नही रही
#सोमबीरनामदेव
आपनी लुगाई तै
शराबी आपनी लुगाई तै- “जे इस देस की बागडोर मेरे हाथ मै आ जाए ना मै इस देश की तक़दीर बदल दू..
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उसकी लुगाई- “डेढ़ के बिज सबेरे का मेरी सलवार पहरे हांडे सै वा तो बदली ना जांदी तक़दीर बदलेगा तू”
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उसकी लुगाई- “डेढ़ के बिज सबेरे का मेरी सलवार पहरे हांडे सै वा तो बदली ना जांदी तक़दीर बदलेगा तू”
यु रूठ कर हमसे वो ना जाते कुछ और बात होती
यु रूठ कर हमसे वो ना जाते कुछ और बात होती
बजाये रूठने के उनको मनाते कुछ और बात होती !
मंद मंद मुस्कुराने से भी तो कुछ नही होने वाला
खिल खिलाके जो हंसते तो कुछ और बात होती !
लहू के छींटो से रोज किये है दामन लाल हमने
प्रेम की बारिश में नहाते तो कुछ और बात होती !
बिछड़ के उनसे जिंदगी गुजारी अंधियरों में हमने
पल के लिए आ जाते साथ तो कुछ और बात होती !
मन की मन में दबाकर रखी बात सदा ''नामदेव ''
हाल ऐ दिल खोल दिखाते तो कुछ और बात होती
सोमबीर '''नामदेव
बजाये रूठने के उनको मनाते कुछ और बात होती !
मंद मंद मुस्कुराने से भी तो कुछ नही होने वाला
खिल खिलाके जो हंसते तो कुछ और बात होती !
लहू के छींटो से रोज किये है दामन लाल हमने
प्रेम की बारिश में नहाते तो कुछ और बात होती !
बिछड़ के उनसे जिंदगी गुजारी अंधियरों में हमने
पल के लिए आ जाते साथ तो कुछ और बात होती !
मन की मन में दबाकर रखी बात सदा ''नामदेव ''
हाल ऐ दिल खोल दिखाते तो कुछ और बात होती
सोमबीर '''नामदेव
रोते हुए को हंसाने वाले बहुत कम है
रोते हुए को हंसाने वाले बहुत कम है
भूले को राह दिखाने वाले बहुत कम हैं !
खुरचते है यहाँ जख्मों को अक्सर लोग
दवा जख्मों पे लगाने वाले बहुत कम है !
ढूंढते है महबूब की ही सूरत सब उसमे
इश्क़ को खुदा बनाने वाले बहुत कम है !
अपनों से रूठ जहनुमं बना ली है दुनिया
छोड़ दे गुस्सा मनाने वाले बहुत कम है !
मक्कारी से भरी पड़ी ये दुनिया ऐ ''नामदेव ''
संभल ले खुद.. समझाने वाले बहुत कम है
सोमबीर ''नामदेव ''
9321283377
भूले को राह दिखाने वाले बहुत कम हैं !
खुरचते है यहाँ जख्मों को अक्सर लोग
दवा जख्मों पे लगाने वाले बहुत कम है !
ढूंढते है महबूब की ही सूरत सब उसमे
इश्क़ को खुदा बनाने वाले बहुत कम है !
अपनों से रूठ जहनुमं बना ली है दुनिया
छोड़ दे गुस्सा मनाने वाले बहुत कम है !
मक्कारी से भरी पड़ी ये दुनिया ऐ ''नामदेव ''
संभल ले खुद.. समझाने वाले बहुत कम है
सोमबीर ''नामदेव ''
9321283377
. जो शरीर नै तंग करै वो खाणा ठीक नही
1 . जो शरीर नै तंग करै वो खाणा ठीक नही
वेवक्त घरां गैर के जाणा ठीक नही !
2 . जार की यारी वेश्या का ठिकाणा ठीक नही !
ख़ुशी के टेम पै मातम का गाणा ठीक नही !!
3. बीर नै ज्यादा मुंह के लाणा ठीक नही !
बेटी हो घर की शोभा घणा घुमाणा ठीक नही !!
4 पास के धन तै काम चालज्या तै कर्जा ठाना ठीक नही !
भाईचारे तै रहना चाहिए गाम मैं पाला ठीक नही !!
5 . सुसराड जमाई . बेटी कै बाप और गाम मैं साला ठीक नही !
पछैत मैं बा...रना घर बीच मैं नाला ठीक नही!!
6 . ऐश करण नै माल बिराना ठीक नही
'''' नामदेव ''''कह तिल हो धोले रंग का दाल मैं क़ाला ठीक नही !!
सोमबीर'''नामदेव '''
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