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शनिवार, 20 अक्टूबर 2012

बस राहन दे दरदां नै क्यूँ और उखाड़े सै ,

बस राहन दे दरदां नै क्यूँ और उखाड़े सै ,

जुदाई आली आग मैं क्यूँ फेर तै साडे सै


...

किम्मे याद कर मरजानी तू मेरी बफावाँ नै

क्यूकर बिसार मैं द्यूं तेरी जफावाँ नै

मेरे प्यार आली ठंडी गरम हवावां नै

पड़ी राहन दे पड़ी दबी किताबां नै क्यूँ धुल नै झाडे सै !



हो ली सै हद भतेरी एतबार और के होवे सै

एक दिन मैं भी रोया था आज क्यों पड़ के पाहयाँ रोवै सै

सब कुछ अपने हाथ खो के मन्ने कित टोहवे सै

जिस की गैल चली गयी थी क्यों उसकी राह मैं कांटे बोवे सै



जिसके जी जो आव वो कहके आज चालज्या

नहीं जखम की कोई दावा ज्यू फोड़े मे खाज चाल्ज्या

काढ के ख्याल दिल तै मेरा घर अपने आज चाल्ज्या

मन्ने मरे होए नै तू क्यूँ आके ज्यादा और सतावे सै !



तू तै बेशक भूल बिसरगी पर मैं ना भूल पाया

सपनेया आली सेज मैं आज तक मै ना झूल पाया

तेरे प्यार आले नशे मैं ना कड़े आज तलक टूल पाया

सँभाल के धरे हुए ख़त ''''नामदेव ''' आज क्यूँ अपने हाथां तै फाड़े सै

सोमबीर सिंह सरोया

गाँव ...डाया

जिला .....हिस्सार ( हरियाणा )

मोब न .,,, 9321083377

गुरुवार, 2 अगस्त 2012

मेरी मजबूरी कौन देखेगा

 खुदगर्जी तो देख ली सबने मेरी मजबूरी कौन देखेगा
जिसको मौका मिलेगा दो रोटी पहले अपनी सकेगा !

तुझे क्या मालूम काम कैसे चल रहा है
मरता क्यों मैं नहीं देख के जमाना जल रहा है
पी कर के जहर आंसू का कैसे हंसी ही उगल रहा है
मिलन दो दिन का देख लिया सबने सदियों लम्बी दूरी कौन देखेगा !

आस का दामन थाम के ......हम तो तेरी आस लेके बैठे है
जाने कब बंद हो जाये क्या मालूम .......बाकि चंद सांसे ले के बैठे है
खुली रख के भी आँखे अपनी पलकों में सपने तुम्हारे देखे है
'' नामदेव ''बस यु हीं रुके है के बाद हमारे कौन राह तुम्हारी देखेगा
लेखक --सोमबीर सिंह सरोया
मोब नंबर 9321083377

सोमवार, 16 जुलाई 2012

कोई बनिया पिटता होगा !!

जाट ने बनिया से उधार ले रखा था । काफी समय हो गया, बनिया ने दबाव देना शुरु किया । जाट ने कह दिया कि कल मेरे घर आ कर पूरा पैसा ब्याज समेत ले जाना ।

बनिया खुश हो कर अगले दिन सुबह जा पहुंचा जाट के घर । जाट ने सेठ को घर के अन्दर बुला लिया और बाहर खिड़की से किसी को इशारा किया । पहले ही ढ़ोल बजाने वाले बुला रखे थे, वे इशारा पाते ही ढोल बजाने लगे और जाट ने सेठ की पिटाई शुरू कर दी । पिट-पिटा कर सेठ ने कहा - "चौधरी साहब, मेरे पैसे समझो कि आ गए, पर मेरी पिटाई की बात किसी को मत बताना, नहीं तो मेरी बेइज्जती हो ज्यागी ।" जाट मान गया ।

कुछ दिन बाद जाट के पड़ौसे में किसी की शादी थी और ढोल बज रहे थे । बनिया के लड़के ने पूछा - बापू, किसका ब्याह सै "

बनिया बोल्या - बेटा, किस्सै का ब्याह कोनी, कोई बनिया पिटता होगा !!

एक बार जंगल के सारे चूहे भाग रहे

एक बार जंगल के सारे चूहे भाग रहे थे, बन्दर ने पूछा की भाई क्या बात है क्यों भाग रहे हो, चूहे ने कहाँ की बस पूछो मत, आफत आ गयी है, जान बचानी मुश्किल हो गयी है .बन्दर ने कहा ऐसा भी क्या हो गया , चूहा बोल्या भाई शेर के बहन को कोई छेड़ के भाज्ग्या अर महारा नाम आ रह्या से

के लिखू र के लिखू

के लिखू र के लिखू दहिया कुछ समझ में नहीं आरया से ,
मरे-बटे इन कोपी पेस्ट आला ने बी काम कसूता पारया से ,

लाईक, कमेन्ट ये करे नहीं और मार के कोपी रोब जमावे ,
लिखु के ? मैं पड़या खेत में कोए मेरी रोटी बी नहीं ल्यारया से ,

कोए कहवे लठ गाड दिया दहिया कोए कहवे मजा नहीं आया ,
थाम घ प्ता लिश अपडेट दिन में मांगो और बाबु मेरा लठ ठारया से,

इब कान खोल के सुण लो सारे जादा बोलन का काम नहीं से ,
... कुछ लिख्या करो थाम बी अपना नहीं दहिया अपना काम चलारया से [;)] [;)] by amit dahiya

अच्छा सा लगाने लगा है उनका ख्याल मुझे ,

अच्छा सा लगाने लगा है उनका ख्याल मुझे ,
खो न जाऊं यादों में उनकी ए दिल जरा संभाल मुझे

दिखने लगा है उनका ही चेहरा अब रात दिन ,
न आये चैन जरा इक पल भी उनके बिन
ख्यालों से उनके जरा बाहर निकाल मुझे !

मुझको दीवाना ना बनादे कहीं सादगी उनकी
होश ना उड़ा दे कहीं ये बानगी उनकी
सपनो में आक़र भी वो रातों को कर देते है बेहाल मुझे !

हसरत ए दीदार अगर यु बढती ही जाएगी
खुमारी सी दिल में जो चढ़ती ही जाएगी
इक दिन ये दीवानगी कर देगी कंगाल मुझे !

ना ले इन्तिहाँ मेरा की मेरा सपनों का कतल हो जाये
तेरे इन्तजार में सुखा हुआ खेत ,मेरे दिल की फ़सल हो जाये
कहीं इन्तजार करते करते '' नामदेव्'' इरादा बदल हो जाये !
sombirnaamdev@gmail.com
9321083377

शुक्रवार, 13 जुलाई 2012

haryana roadways

real photo

My Dear,With Due Respect I Would Like To Say That

देशी छोरा एक शहरी लड़की से " फ़ोन नंबर देवे सै के? "
लड़की "तमीज़ से बात करो "

छोरा " My Dear,With Due Respect I Would Like To Say That फ़ोन नंबर देवे सै के ?"

के बेरा था

के बेरा था जिन्दगी मन्ने इसे मोड़ पै ले ज्यागी ,
जी तै ज्यादा चाहय था जिसने इक दिन धोखा दे ज्यागी !

काळू अर भूंडू नै

काळू अर भूंडू नै घणी दारू पी राखी थी । रात नै साईकल पै बैठ कै कच्चे रास्ते तैं घरां जावैं थे । काळू साईकल चलावै था अर भूंडू पाछै बैठ्या था ।

भूंडू रास्ते मैं लुढ़क ग्या । काळू नै कोए ध्यान नहीं, मस्ती में झूमता घरां पहुंच्या अर बोल्या - ले भाई उतर, घर आ-ग्या ।

जब पाच्छे तैं कोए जवाब नहीं आया, तै काळू का नशा कुछ ढीला हुया, साईकल ठा कै उल्टा भाज लिया । राह में देख्या - भूंडू मस्ती में चूर राही में लोट रहया था । काळू उसनै देख कै बोल्या - आंह रै, ठीक सै ?

काळू नै जवाब दिया - "मैं ठीक बैठ्या सूँ, तू साईकल चलाता रह !"

गुरुवार, 12 जुलाई 2012

पर लेणी सै खार-की !!

पहली बार ब्याई हुई भैंस को "खार-की" कहा जाता है ।

कई चमार भैंस खरीदने एक गांव में चले गए, उनको एक "तुरत की ब्याई" भैंस की जरूरत थी । एक जगह घणे सारे जाट हुक्का पीवैं थे । एक चौधरी नै बूझ लिया - " रै कित जाओ सो ?"

एक चमार बोला - "चौधळी साब, एक भैंस लेणी सै"

चौधरी - किसी (कैसी) भैंस लोगे ?

चमार - ब्या रही हो चाहे कितनी-ऐं बै, पर लेणी सै खार-की !!

जाट नै एक बाणियां तैं पईसे उधार ले राक्खे थे

एक बै एक जाट नै एक बाणियां तैं पईसे उधार ले राक्खे थे । घणे दिन हो-गे, उसतैं पईसे पाट्टे कोनी ।

बाणियां नै गाम कट्ठा कर लिया अर बोल्या - भाइयो, मेरे पईसे का जुगाड़ बिठवाओ । गाम आळे बोले - लाला जी, इसपै घणे पईसे उधार हो-गे, इसतैं सारे पईसे तै दिये नहीं जावैं, आधे पईसे छः महीने में दे देगा ।

बाणियां नै गाम आळां की बात मान ली अर जाट के आधे पईसे माफ कर दिये ।

छः महीने पाच्छै बाणियां जाट तैं फिर कहण लाग्या - भाई, तन्नैं वो पईसे देणे थे ।

जाट बोल्या - देख भाई, घणा तै बोल्लै मन्ना, आधे तै तेरे दे ए दिये - अर बाकी आधे तेरे न्यूं ऐं कदे दे दूंगा !!

कौन खता होई मेरे तै यो पूछ रह्या सै किसान तन्नै .

कौन खता होई मेरे तै यो पूछ रह्या सै किसान तन्नै .
एक गंठा दो रोटी लिखदी क्यूँ किस्मत मैं भगवान तन्नै !

उठ सबेरे हल जोड़ू मैं पानी तक ना पीना
मरे बरोबर जिन्दगी मेरी के जीने मैं जीना
गर्मी मैं हाल बेहाल मेरा ना सुख्या कदे पसीना
गर्मी सर्दी चौमासे मैं न मिलदा कती आराम मंन्नै

दुनिया का अन्नदाता मैं ,मेरे घर मैं दो दाणे ना
सब नै अपनी चिंता लाग रही कोई मेरा दर्द पिछाने ना
धरती ऊपर सोकें करूँ गुजारा कदे मिले नरम बिछाने ना
सुख का साँस कदे मिलया ना दी पूरी धरती छान मंन्नै

मेरी रुली मुमताज गरीबी मैं कपडे लिरम लीर रहै
सुख की साँस कदे ना आवे दुःख मै हर दम सीर रहै
कोय सुननिया ना म्हारी किस्ते अपनी पीर कहैं
इस जग मै कोय म्हारा तू तो ले प हचान मंन्नै

जितना मोल मंन्नै मिलै फसल का उतना साहुकार मुनाफा खावें सै
ये साहुकार और सरकार मंन्नै लूट लूट के खावें सै
मेरी मेहनत का फायदा तो ये साहूकार उठावें सै
इस साहूकारी और सरकारी नै कर राख्या सै बीरान मंन्नै

बनके बैल कमाया पर मेरे हाथ किम्मै न आया
कुछ साहुकार नै ले लिया कुछ बैंक का ब्याज चुकाया
कददे खड़ी गाल दी फसल खेत मैं कददे पानी बिन सुखाया
नामदेव तन्नै बुझे सै किस दिन आवेगा मेरे ऊपर तरस भगवान् तन्नै
सोमबीर सिंह '' नामदेव ''
sombirnaamdev@gmail.com
sombirnaamdev@yahoo.com

हरियाणा की सांस्कृतिक

राम राम भाइयों मैं यहाँ इस पेज हरियाणा  की सांस्कृतिक धरोहरों और
ऐतहासिक इमारतों , और मुख्या शहरों के बारे में ज्ञानवर्धक और रोचक जानकारियां  पोस्ट करूँगा!
 उम्मीद है आप को  पसंद आएगी  , और साथ में होगा हरयाणवी जोक्स का तड़का

शुक्रवार, 29 जून 2012

ऊपर वाले मैं तुमको क्या बोलू ,

ऊपर वाले मैं तुमको क्या बोलू ,
देखा जलवा तेरी खुदाई का !
कोई रहा गुलो गुलजार ता उम्र,
कोई झेले सालों साल गम जुदाई का !

लाश को किसी की कफ़न न मिला ,
किसी की याद में ताज महल बन जाते है !
किसी की मौत पे दो आंसू न मिले ,
तो किसी रोने पे गजल बन जाते है !

ता उम्र भटकता रहा सफ़र में कोई ,
किसी का पहला कदम मंजिल बन जाता है !
कोई ता उम्र करके वफ़ा रहा बेवफा ,
तो कोई बेवफा ता उम्र करके दगा संग दिल कहलाता है !

sombirnaamdev@gmail.com
mob no .9321083377

बुधवार, 2 मई 2012

मैं धरती हिंदुस्तान की

मैं धरती हिंदुस्तान की ,मैं आज भी गुलाम खड़ी हूँ !
अंग्रेजों की कैद से छुटके , अपनों की कैद में पड़ी हु !

अंग्रेजो से लड़के मेरे पुत्रों ने आज़ाद कराया.

फिर अपने ने ही मुझे लूट लूट के खाया ..
रिश्वत और भ्रस्टाचार की बेडी में मैं आज भी जड़ी हूँ !

200 साल मैं अंग्रेजो की झूठा खाया .

मेरे पुत्र वीरों ने मुझे कैद से छुड़ाया..
आज के ये नेता क्या जाने ,मैं कौन सी आग में सड़ी हूँ !

वीर पुत्रों की कुर्बानी को मैंने अभी नहीं था भुलाया .

इन कुर्सी के भूखे
लोगों ने मुझे फिर से सूली चढ़ाया ..
एक बार फिर से मैं अपने पुत्रों के हाथों गयी हडी हूँ !

पाकिस्तान बना के दो हिस्सों में जब मैं बाँट दी गयी.

मेरी दोनों बाहें जालिमों के हाथों काट दी गयी ..
धरती ऊपर दी खींच लकीरें, दो हिस्सों में मैं बंडी हूँ

आज़ादी के झूठे अग्वे कुर्सी सरताज हो गए .

शहीदों के वंशज रोटी के मोहताज हो गये..
".नामदेव् " हालत देख आज शहीदों की, मैं धरती में आज गडी हूँ

जड़ी=जकड़ी
सड़ी=जली
बंडी=बंटी
अग्वे=अगवाई करने वाले
हडी=ठगी गयी

रविवार, 22 अप्रैल 2012

मेरे दर्द की दवा आज कोई मेरे सनम करदे

मेरे दर्द की दवा आज कोई मेरे सनम करदे,
थोडा मुस्करा के मेरे गम को कम करदे |

तेरी मेहरबानी मुझपे सनम अगर हो जाये ,
मेरे लिए आसान जिन्दगी की डगर हो जाये ,
कट जायेगा सफ़र जिन्दगी का तू अगर मेरे क़दमों के संग कदम धरदे |

बिना तेरे साथी जिन्दगी मेरी अधूरी सी है,
जिन्दा है लेकिन सांसों से दुरी सी है,
मुदत्तों से मुर्दा पड़े इस जिस्म में थोडा सा दम भरदे|

यादों के साये आज मेरे चारोँ और घूमते है ,
तेरी जुल्फों के के बादल आज भी मेरे सीने को चुमते है ,
तेरी इन मद मस्त आँखों की मस्ती को मेरे जख्मों का मरहम करदे |

साथ जो मिले गर तुम्हारा मेरी जिन्दगी सवार जाये,
तुझको पाकर मेरा जीवन खुशियों से भर जाये ,
भुला के आज ये सारे गम आँखे मेरी ख़ुशी से नाम करदे |

दर्द ए जुदाई अब और नही सह सकेंगे,
तेरे सिवा और किसी से न कह सकेंगे ,
आ जाओ इससे पहले पहले की की मौत मुझे बेदम करदे |

ये दिल तुम बिन दर्दो गम से आहें भरेगा ,
जख्मी दिल की दवा तुम बिन कौन करेगा ,
"नामदेव" पे रहम तू थोडा आज सनम कर दे ||

रविवार, 15 अप्रैल 2012

बात उन दिनों की है

बात उन दिनों की है जब लोगों के पास मोबाइल फोन नहीं हुआ करते थे.
 संता की बीबी अस्पताल में भर्ती थी.
 उसे बच्चा होने वाला था. चूंकि संता को बहुत जरूरी काम से ऑफिस जाना था 
इसलिए उसने कुछ पैसे देकर एक नर्स को मनाया
और अपने ऑफिस का नंबर देकर उससे कहा -”जैसे ही मेरी बीवी को बच्चा पैदा हो
 मुझे फ़ौरन फोन कर के बता देना. फोन मेरे बॉस के पास रहता है 
इसलिए तुम्हे कोडवर्ड में बात करनी होगी. यदि लड़का हो तो कहना कि मैं पास हो गया.
 और यदि लड़की हो तो कहना कि फ़ैल हो गया… ठीक है ?
नर्स के मुंह से हाँ सुनकर संता ऑफिस चला गया. लगभग 2 घंटे बाद 
उसके बॉस ने उसे अपने केबिन में बुलाया और कहा –
 “तुम्हारे लिए किसी औरत का फोन आया था. 
वह शायद तुम्हारे किसी रिजल्ट के बारे में बता रही थी … 
 हाँ हाँ सर, रिजल्ट…. क्या रिजल्ट बताया उसने ?” – संता ने उत्सुकता से पूछा.>
तुम्हारी सप्लीमेंट्री (पूरक) आई है.” – बॉस ने जवाब दिया

शनिवार, 14 अप्रैल 2012

माँ की ममता और फर्ज बाप का
दुनिया में सब पे भारी है
बेटी नाम दुलार का है
नाम समर्पण का नारी है

भाई सा सच्चा साथी दुनिया में कोई और नहीं .
सच्चे यार की वफ़ा जैसा दुनिया में कोई और नहीं ..
बहन है सच्ची रक्षक दुःख सुख की संगी है

दादा परिवार की नीव जिस पर परिवार की ईमारत खड़ी है
दादी ठंडी छाव् बनके सर के ऊपर छत सी पड़ी है
ये दोनों है आने वाले कल प्रेरणा
बिना इनके जिन्दगी बे रंगी है

बेटे है जमा पूंजी जो काम वक़्त पे आये
जवानी का गौरव है बेटे और बुढ़ापे की लाठी है
बिना बेटे के बाप की जिंदगी ही बे ढंगी है

सोमवार, 9 अप्रैल 2012

दर्द ज़माने का पाया मैंने तुमसे दिल लगा के

जाने क्या खोया क्या पाया मैंने तुमसे दिल लगा के
नींद आँखों की खोयी ,दर्द ज़माने का पाया मैंने तुमसे दिल लगा के

आँखों में नींद का नाम नहीं.
दिल में चैन का काम नहीं ..
बेदर्द ज़माने में जज्बातों का कोई दाम नहीं ...
जाने कौन सा दर्द जगाया मैंने तुमसे दिल लगा के
जाने क्या खोया क्या पाया मैंने तुमसे दिल लगा के
नींद आँखों की खोयी ,दर्द ज़माने का पाया मैंने तुमसे दिल लगा के

... दिल को सुकून मिले ना मिले .
आँखों को चैन मिले न मिले ..
जख्म दिल के सिले न सिले ...
फिर भी जाने क्यू हर वकत जख्मों को सहलाया मैंने तुम से दिल लगाके
जाने क्या खोया क्या पाया मैंने तुमसे दिल लगा के
नींद आँखों की खोयी ,दर्द ज़माने का पाया मैंने तुमसे दिल लगा के

सोचा था उनसे मिलकर थोडा सा चैन मिले.
वो जब भी मिले मुझसे हर वक़्त बेचैन मिले ..
दिल के सारे जख्म ही मुझे उनकी ही देन मिले...
दर्द ज़माने कम पड़ गया जितना पाया मैंने तुझसे दिल लगा के

जाने क्या खोया क्या पाया मैंने तुमसे दिल लगा के
नींद आँखों की खोयी ,दर्द ज़माने का पाया मैंने तुमसे दिल लगा के

शुक्रवार, 6 अप्रैल 2012

भ्रम में आकर आदमी तमाम तरह की आदतों का शिकार हो जाता है

संपति भरम गंवाइ के, हाथ रहत कछु नाहिं

ज्यों रहीम ससि रहत है, दिवस अकासहिं मांहि।।6।।

अर्थ: कविवर रहीम कहते हैं कि भ्रम में आकर आदमी तमाम तरह की आदतों का शिकार हो जाता है और उसमें अपनी संपत्ति का अपव्यय करता रहता है और एक दिन ऐसा आ जाता है जब उसके पास कुछ भी शेष नहीं रह जाता। इसके साथ ही समाज में उसकी प्रतिष्ठा खत्म हो जाती है।

शनिवार, 3 मार्च 2012

कबीर सोयी सूरमा, मन सूं मांदे झूझ

कबीर सोयी  सूरमा, मन सूं मांदे झूझ
पंच प्यादा पारी  ले, दूर करे सब दूज


अनुवाद :कबीर, वह अकेला योद्धा है, जो मन पर पूर्ण नियंत्रण पा  लेता है
            कामुक पांच इन्द्रियों को कुचल कर  सभी  द्वंद्व को हटा देता है

            अर्थ    : कबीर का कहना है कि वह ही  वास्तविक योद्धा जो मन के साथ संलग्न
                     रहते हुए भी उसपर संपूर्णतः पूर्ण रूप से  नियंत्रण रखता हो . वो  पांच
 सैनिकों (इन्द्रियों ) और सभी द्वंद्व को हटा. सकता है
केसन   कहा   बिगाडिया , जे  मुंडे    सौ  बार
मन  को कहे  ना मूंडिये  , जामें  विषे  विकार 


अनुवाद :   क्या नुकसान बालो  ने  किया है, जिसे बार-बार  उन्हें मुडाते रहते हो
                               क्यों न मन को मूंडिये  , जिसमे  अनियंत्रित, अनगिनत जहरीले विचार पैदा होते है

                                    अर्थ     : मन साफ - अधिक से अधिक शुद्ध, सकारात्मक और निस्वार्थ विचारो से मन को परिष्कृत करना .
कबीर माला  काठ  की , कहीं समझावे  तोही
मन ना फिरावे  आपना , कहा   फिरावे  मोहि


अनुवाद : कबीर, लकड़ी के मोतियों से  बनी ये  माला  , क्या तुम्हे  सिखा सकती  हैं?
                       यदि तुम्हे अपने मन की गति पर ही नियंत्रण नहीं है, तो मोती की गति का नियंत्रण क्यों?

अर्थ      :मोती नहीं मन पर नियंत्रण रखो.

मूंड मुंडावत दिन गए, अजहूँ ना मिलिया राम


                          मूंड मुंडावत  दिन गए, अजहूँ  ना मिलिया  राम
                          राम नाम कहू  क्या करे  , जे मन  के ओरे  काम


अनुवाद : सिर मुंडवाते युग  बीत चुके हैं अभी तक भगवान के साथ कोई मिलाप नहीं हुआ
             परमेश्वर के नाम का सस्वर पाठ व्यर्थ है, जब मन कुछ और  कर रहा है

अर्थ     : मन पर नियंत्रण - निरीक्षण

मंगलवार, 28 फ़रवरी 2012

उदधि बड़ाई कौन है, जगत पियासो जाय ।।

|| 16 ||
धनि रहीम जल पंक को, लघु जिय पियत अघाय ।
उदधि बड़ाई कौन है, जगत पियासो जाय ।।

|| 17 ||
तैं रहीम मन आपुनो, कीन्हो चारु चकोर ।
निसि बासर लाग्यौ रहे, कृष्णचंद्र की ओर ।।

|| 18 ||
रहिमन यहि संसार में, सब सो मिलिए धाइ ।
ना जाने केहि रूप में, नारायण मिलि जाइ ।।

|| 19 ||
दुरदिन परे रहीम कहि, दुरथल जैयत भागि ।
ठाढ़े हूजत घूर पर, जब घर लागति आगि ।।

|| 20 ||
अब रहीम मुसकिल परी, गाढ़े दोऊ काम ।
साँचे ते तो जग नहीं, झूठे मिलैं न राम ।।

यह रहीम जिय सोस ।

|| 11 ||
बसि कुसंग चाहत कुसल, यह रहीम जिय सोस ।
महिमा घटि समुद्र की, रावन बसयौ परोस ।।

|| 12 ||
तरुवर फल नहिं खात है, सरवर पियहि न पान ।
कहि रहीम परकाज हित, संपति सँचहि सुजान ।।

|| 13 ||
रहिमन याचकता गहे, बड़े छोट हवै जात ।
नारायन हूँ को भयौ, बावन अँगुर गात ।।

|| 14 ||
कह रहीम संपति सगे बनत बहुत बहु रीत ।
बिपत-कसौटी जो कसे, तेई साँचे मीत ।।

|| 15 ||
जो बड़ेन को लघु कहे, नहिं रहीम घटि जांहि ।
गिरिधर मुरलीधर कहे, कुछ दुख मानत नांहि ।।

जो रहीम गति दीप की


|| 6 ||
जे अंचल दीपक दुरयौ, हन्यौ सो ताही गात ।
रहिमन असमय के परे, मित्र शत्रु हवै जात ।।

|| 7 ||
जो रहीम गति दीप की, कुल कपूत गति सोय ।
बारे उजियारे लगे, बढ़े अँधेरो होय ।।

|| 8 ||
टूटे सुजन मनाइये, जो टुटे सौ बार ।
रहिमन फिरि-फिरि पोइए, टुटे मुक्ताहार ।।

|| 9 ||
रहिमन देख बड़ेन को, लघु न दीजै डारि ।
जहाँ काम आवे सुई, कहा करै तरवारि ।।

|| 10 ||
बड़े बड़ाई नहिं करैं, बड़े न बोलें बोल ।
रहिमन हिरा कब कहै, लाख टका मेरो मोल ।।

रहीम के दोहे

रहीम के दोहे

|| 1 ||
एकै साधे सब सधैं, सब साधे सब जाय ।
रहिमन मूलहि सींचिबो, फूलै फलै अघाय ।।

|| 2 ||
कह रहीम कैसे निभे, बेर केर का संग ।
यै डोलत रस आपने, उनके फाटत अंग ।।

|| 3 ||
खीरा सिर ते काटिए, मलियत लौन लगाय ।
रहिमन करुए मुखन को, चहियत इहै सजाय ।।

|| 4 ||
छिमा बड़ेन को चाहिए, छोटन को उत्पात ।
का रहीम हरि को घटयौ, जो भृगु मारी लात ।।

|| 5 ||
जे गरीब सो हित करै, धनि रहीम वे लोग ।
कहा सुदामा बापुरो, कृष्ण मिताइ जोग ।।

शनिवार, 25 फ़रवरी 2012

दिल के ख्वाब जाने क्यू अधूरे रह जाते है

दिल के अरमान दिल में रह जाते है
आसिक बेचारे मासूक का हर सितम सह जाते है

उनकी दास्ताँ अ सितम बयां क्या करें
क्यों जख्मो को फिर से क्यू  नया करें
ये सोच कर फिर से चुप चाप से बैठे रह जाते है .

दिल के अरमान दिल में रह जाते है
आसिक बेचारे मासूक का हर सितम सह जाते है
दिल के अरमान दिल में रह जाते है
आसिक बेचारे मासूक का हर सितम सह जाते है

उनकी दास्ताँ अ सितम बयां क्या करें
क्यों जख्मो को फिर से क्यू  नया करें
ये सोच कर फिर से चुप चाप से बैठे रह जाते है .

दिल के अरमान दिल में रह जाते है
आसिक बेचारे मासूक का हर सितम सह जाते है

हर मोड़ पे वो सामने क्यू आ जाते हैं
आँखों में ख्वाब बन  के समां जाते है
बात वो फिर अनकही सी कह जाते है

दिल के अरमान दिल में रह जाते है
आसिक बेचारे मासूक का हर सितम सह जाते है

दिल की तमन्ना  दिलबर को कैसे बयां करे
 दिल की चाहत को कैसे पूरा करे
दिल के ख्वाब जाने क्यू अधूरे रह जाते है

दिल के अरमान दिल में रह जाते है
आसिक बेचारे मासूक का हर सितम सह जाते है

शुक्रवार, 24 फ़रवरी 2012

रहिमन वे नर मर गये, जे कछु माँगन जाहि।
उनते पहिले वे मुये, जिन मुख निकसत नाहि॥
रहिमन विपदा ही भली, जो थोरे दिन होय।
हित अनहित या जगत में, जानि परत सब कोय॥
बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।
पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर॥
रहिमन चुप हो बैठिये, देखि दिनन के फेर।
जब नीके दिन आइहैं, बनत न लगिहैं देर॥
बानी ऐसी बोलिये, मन का आपा खोय।
औरन को सीतल करै, आपहु सीतल होय॥
मन मोती अरु दूध रस, इनकी सहज सुभाय।
फट जाये तो ना मिले, कोटिन करो उपाय॥
वे रहीम नर धन्य हैं, पर उपकारी अंग।
बाँटनवारे को लगै, ज्यौं मेंहदी को रंग॥
रहिमह ओछे नरन सो, बैर भली ना प्रीत।
काटे चाटे स्वान के, दोउ भाँति विपरीत॥
रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय।
टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गाँठ परि जाय॥
रहिमन पानी राखिये, बिन पानी सब सून।
पानी गये न ऊबरे, मोती, मानुष, चून॥
टूटे सुजन मनाइए, जो टूटे सौ बार। 
रहिमन फिरि फिरि पोहिए, टूटे मुक्ताहार॥
बिगरी बात बने नहीं, लाख करो किन कोय।
रहिमन बिगरे दूध को, मथे न माखन होय॥
आब गई आदर गया, नैनन गया सनेहि।
ये तीनों तब ही गये, जबहि कहा कछु देहि॥
चाह गई चिंता मिटी, मनुआ बेपरवाह।
जिनको कछु नहि चाहिये, वे साहन के साह॥
रहिमन देख बड़ेन को, लघु न दीजिये डारि।
जहाँ काम आवै सुई, कहा करै तलवारि॥
माली आवत देख के, कलियन करे पुकारि।
फूले फूले चुनि लिये, कालि हमारी बारि॥

तरुवर फल नहिं खात है,

तरुवर फल नहिं खात है, सरवर पियहि न पान।
कहि रहीम पर काज हित, संपति सँचहि सुजान॥
खीरा को मुंह काटि के, मलियत लोन लगाय। 
रहिमन करुए मुखन को, चहियत इहै सजाय॥
जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करि सकत कुसंग। 
चन्दन विष व्यापत नहीं, लपटे रहत भुजंग॥
जे गरीब सों हित करै, धनि रहीम वे लोग। 
कहा सुदामा बापुरो, कृष्ण मिताई जोग॥
जो बड़ेन को लघु कहे, नहिं रहीम घटि जांहि। 
गिरिधर मुरलीधर कहे, कछु दुख मानत नांहि॥
खैर, खून, खाँसी, खुसी, बैर, प्रीति, मदपान।
रहिमन दाबे न दबै, जानत सकल जहान॥

एकै साधे सब सधै, सब साधे सब जाय।

एकै साधे सब सधै, सब साधे सब जाय। 
रहिमन मूलहिं सींचिबो, फूलै फलै अगाय॥
देनहार कोउ और है, भेजत सो दिन रैन। 
लोग भरम हम पै धरैं, याते नीचे नैन॥
अब रहीम मुसकिल परी, गाढ़े दोऊ काम। 
सांचे से तो जग नहीं, झूठे मिलैं न राम॥
गरज आपनी आप सों रहिमन कहीं न जाया।
जैसे कुल की कुल वधू पर घर जात लजाया॥
छमा बड़न को चाहिये, छोटन को उत्पात।
कह ‘रहीम’ हरि का घट्यौ, जो भृगु मारी लात॥

दिल के ख्वाब जाने क्यू अधूरे रह जाते है

दिल के अरमान दिल में रह जाते है
आसिक बेचारे मासूक का हर सितम सह जाते है

उनकी दास्ताँ अ सितम बयां क्या करें
क्यों जख्मो को फिर से क्यू  नया करें
ये सोच कर फिर से चुप चाप से बैठे रह जाते है .

दिल के अरमान दिल में रह जाते है
आसिक बेचारे मासूक का हर सितम सह जाते है

हर मोड़ पे वो सामने क्यू आ जाते हैं
आँखों में ख्वाब बन  के समां जाते है
बात वो फिर अनकही सी कह जाते है

दिल के अरमान दिल में रह जाते है
आसिक बेचारे मासूक का हर सितम सह जाते है

दिल की तमन्ना  दिलबर को कैसे बयां करे
 दिल की चाहत को कैसे पूरा करे
दिल के ख्वाब जाने क्यू अधूरे रह जाते है

दिल के अरमान दिल में रह जाते है
आसिक बेचारे मासूक का हर सितम सह जाते है

गुरुवार, 23 फ़रवरी 2012

आज सचिन के खिलाफ हर तरफ से आवाज उठ रही है .
लेकिन जरा सोचिये सचिन ने भारतीये क्रिकेट को क्या नहीं दिया
याद कीजिये उन दिनों को जब टीम इकलोते batsman  होते जो मैच जीताते थे .
उनके   आउट होते ही लोग टीवी बंद कर देते थे आज वो वहल नहीं रहे
 तो क्या हुआ उनका अनुभव टीम के साथ है जो टीम के काम आयेगा
वो क्या करना चाहते है ये उनपर छोड़कर आलोचना करनी बंद कीजिये 

बुधवार, 22 फ़रवरी 2012

ऐ दिल ऐ नादाँ बता तेरी रजा क्या है

ऐ दिल ऐ नादाँ बता तेरी रजा क्या है
दिल तोड़ ने वालों की सजा क्या है ,
जो जिन्दगी भर तडपता छोड़ गए .
एक पल में वादा ऐ वफ़ा तोड़ गए ..
खुद से जो निभा न पाए
उन की तेरे साथ वफ़ा क्या है
ऐ दिल ऐ नादाँ बता तेरी रजा क्या है
दिल तोड़ ने वालों की सजा क्या है ,
जिन्दगी भर साथ चलने का वादा कर गए .
जरा सा तूफ़ान देख के डर गए ..
ऐसे बेवफा संगदिल महबूब में
बता रखा क्या है
ऐ दिल ऐ नादाँ बता तेरी रजा क्या है
दिल तोड़ ने वालों की सजा क्या है ,
सोचा क्या था क्या हो गया
वो जालिम जाने किसके सपनों में खो गया
भूल जा उस रिश्ते को
उस रिसते में बाकी बचा क्या है
ऐ दिल ऐ नादाँ बता तेरी रजा क्या है
दिल तोड़ ने वालों की सजा क्या है ,

शनिवार, 18 फ़रवरी 2012

वो वफ़ा न सके

वो वफ़ा न सके उनकी कोई मजबूरी होगी .
अपनी हालत क्या होगी छोडिये उनकी तो हसरत पूरी होगी

गुरुवार, 16 फ़रवरी 2012

इन्जार लम्बा हो गया

दर्द को हम दवा बनाकर पी ते चले गए
उनकी आने के इन्तजार में जीते चले गए
इन्जार लम्बा हो गया इतना के मरना मुश्किल हो गया हमारा
और ना हम जीने के काबिल रहे

दिल ही दिल

दिल ही दिल हम उनको चाहते रहे
बात अपने मन की छुपाते रहे ,
जुदाई के भवर में फस कर हाल वो हमारा हुआ
न इधर के रहे न उधर के रहे

सोमवार, 13 फ़रवरी 2012

एक तेरी दीवानगी जो मेरे दिल पे छाई है

एक तेरी दीवानगी जो मेरे दिल पे छाई है
यादों इक घटा उमड़ कर दिल आसमान पर आयी है
यादों के बादल जब भी मेरे दिल छाएंगे
मेरे महबूब तेरा चेहरा ही आँखों के सामने पाएंगे
मेरी ये आँखें तेरे उस मासूम से चेहरे को न कभी भूल पायी है
यादों इक घटा उमड़ कर दिल आसमान पर आयी है
एक तेरी दीवानगी जो मेरी दिल पे छाई है
दीवाने पन हम उनको ढूढ़ते रहे
वो गैरों की आंधी में बह गए
फिर जाने क्यू लगता है के वो आज हमसे मिलने को आयी है
यादों इक घटा उमड़ कर दिल आसमान पर आयी है
एक तेरी दीवानगी जो मेरी दिल पे छाई है

शुक्रवार, 10 फ़रवरी 2012

दीवाने की बस्ती

दीवाने की बस्ती में हर तरफ तन्हाई सी छायी है
मासूक के घर पे आज बारात जो आयी है
तारों का हाल क्या होगा जब चाँद ने चमकना  छोड़ दिया ,
शराब का हाल क्या होगा जब शराबी ने पीना छोड़ दिया ..
मासूक का हाल क्या होगा जब आशिकों नेबहलना छोड़ दिया

काश खुदा ने हुस्न वालों अहसास ए दर्द दिया होता .

काश खुदा ने हुस्न वालों अहसास ए दर्द दिया होता .
हो सकता था जालिम ने अपने से दूर न किया होता
हुस्न की अदाएं दिखाकर
मासूम दिल को अपने जाल में फंसाकर
नज़रों के फिर तीर चलाकर
दिल से दिल लगाकर फिर झट से दूर न किया होता
काश खुदा ने हुस्न वालों अहसास ए दर्द दिया होता
बाँहों की फिर पिंग झुलाकर
नए नए वो ख्वाब दिखाकर
सपनों की फिर सेज सजाकर
मीठी मीठी नींद में सुलाकर अचानक से फिर न जगा जगा दिया
काश खुदा ने हुस्न वालों अहसास ए दर्द दिया होता .


सोमबीर सिंह सरोया