कबीर माला काठ की , कहीं समझावे तोही
मन ना फिरावे आपना , कहा फिरावे मोहि
अनुवाद : कबीर, लकड़ी के मोतियों से बनी ये माला , क्या तुम्हे सिखा सकती हैं?
यदि तुम्हे अपने मन की गति पर ही नियंत्रण नहीं है, तो मोती की गति का नियंत्रण क्यों?
अर्थ :मोती नहीं मन पर नियंत्रण रखो.
मन ना फिरावे आपना , कहा फिरावे मोहि
अनुवाद : कबीर, लकड़ी के मोतियों से बनी ये माला , क्या तुम्हे सिखा सकती हैं?
यदि तुम्हे अपने मन की गति पर ही नियंत्रण नहीं है, तो मोती की गति का नियंत्रण क्यों?
अर्थ :मोती नहीं मन पर नियंत्रण रखो.
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