एकै साधे सब सधै, सब साधे सब जाय।
रहिमन मूलहिं सींचिबो, फूलै फलै अगाय॥
रहिमन मूलहिं सींचिबो, फूलै फलै अगाय॥
देनहार कोउ और है, भेजत सो दिन रैन।
लोग भरम हम पै धरैं, याते नीचे नैन॥
लोग भरम हम पै धरैं, याते नीचे नैन॥
अब रहीम मुसकिल परी, गाढ़े दोऊ काम।
सांचे से तो जग नहीं, झूठे मिलैं न राम॥
सांचे से तो जग नहीं, झूठे मिलैं न राम॥
गरज आपनी आप सों रहिमन कहीं न जाया।
जैसे कुल की कुल वधू पर घर जात लजाया॥
जैसे कुल की कुल वधू पर घर जात लजाया॥
छमा बड़न को चाहिये, छोटन को उत्पात।
कह ‘रहीम’ हरि का घट्यौ, जो भृगु मारी लात॥
कह ‘रहीम’ हरि का घट्यौ, जो भृगु मारी लात॥
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