गुरुवार, 19 जुलाई 2012
हर तस्वीर कुछ कहती है ...: आज का मीडिया
हर तस्वीर कुछ कहती है ...: आज का मीडिया: यह है हमारे आज की मीडिया की सच्चाई ...
सोमवार, 16 जुलाई 2012
कोई बनिया पिटता होगा !!
जाट ने बनिया से उधार ले रखा था । काफी समय हो गया, बनिया ने दबाव देना
शुरु किया । जाट ने कह दिया कि कल मेरे घर आ कर पूरा पैसा ब्याज समेत ले
जाना ।
बनिया खुश हो कर अगले दिन सुबह जा पहुंचा जाट के घर । जाट ने सेठ को घर के अन्दर बुला लिया और बाहर खिड़की से किसी को इशारा किया । पहले ही ढ़ोल बजाने वाले बुला रखे थे, वे इशारा पाते ही ढोल बजाने लगे और जाट ने सेठ की पिटाई शुरू कर दी । पिट-पिटा कर सेठ ने कहा - "चौधरी साहब, मेरे पैसे समझो कि आ गए, पर मेरी पिटाई की बात किसी को मत बताना, नहीं तो मेरी बेइज्जती हो ज्यागी ।" जाट मान गया ।
कुछ दिन बाद जाट के पड़ौसे में किसी की शादी थी और ढोल बज रहे थे । बनिया के लड़के ने पूछा - बापू, किसका ब्याह सै "
बनिया बोल्या - बेटा, किस्सै का ब्याह कोनी, कोई बनिया पिटता होगा !!
बनिया खुश हो कर अगले दिन सुबह जा पहुंचा जाट के घर । जाट ने सेठ को घर के अन्दर बुला लिया और बाहर खिड़की से किसी को इशारा किया । पहले ही ढ़ोल बजाने वाले बुला रखे थे, वे इशारा पाते ही ढोल बजाने लगे और जाट ने सेठ की पिटाई शुरू कर दी । पिट-पिटा कर सेठ ने कहा - "चौधरी साहब, मेरे पैसे समझो कि आ गए, पर मेरी पिटाई की बात किसी को मत बताना, नहीं तो मेरी बेइज्जती हो ज्यागी ।" जाट मान गया ।
कुछ दिन बाद जाट के पड़ौसे में किसी की शादी थी और ढोल बज रहे थे । बनिया के लड़के ने पूछा - बापू, किसका ब्याह सै "
बनिया बोल्या - बेटा, किस्सै का ब्याह कोनी, कोई बनिया पिटता होगा !!
एक बार जंगल के सारे चूहे भाग रहे
एक बार जंगल के सारे चूहे भाग रहे थे, बन्दर ने पूछा की भाई क्या बात है
क्यों भाग रहे हो, चूहे ने कहाँ की बस पूछो मत, आफत आ गयी है, जान बचानी
मुश्किल हो गयी है .बन्दर ने कहा ऐसा भी क्या हो गया , चूहा बोल्या भाई शेर
के बहन को कोई छेड़ के भाज्ग्या अर महारा नाम आ रह्या से
के लिखू र के लिखू
के लिखू र के लिखू दहिया कुछ समझ में नहीं आरया से ,
मरे-बटे इन कोपी पेस्ट आला ने बी काम कसूता पारया से ,
लाईक, कमेन्ट ये करे नहीं और मार के कोपी रोब जमावे ,
लिखु के ? मैं पड़या खेत में कोए मेरी रोटी बी नहीं ल्यारया से ,
कोए कहवे लठ गाड दिया दहिया कोए कहवे मजा नहीं आया ,
थाम घ प्ता लिश अपडेट दिन में मांगो और बाबु मेरा लठ ठारया से,
इब कान खोल के सुण लो सारे जादा बोलन का काम नहीं से ,
... कुछ लिख्या करो थाम बी अपना नहीं दहिया अपना काम चलारया से [;)] [;)] by amit dahiya
मरे-बटे इन कोपी पेस्ट आला ने बी काम कसूता पारया से ,
लाईक, कमेन्ट ये करे नहीं और मार के कोपी रोब जमावे ,
लिखु के ? मैं पड़या खेत में कोए मेरी रोटी बी नहीं ल्यारया से ,
कोए कहवे लठ गाड दिया दहिया कोए कहवे मजा नहीं आया ,
थाम घ प्ता लिश अपडेट दिन में मांगो और बाबु मेरा लठ ठारया से,
इब कान खोल के सुण लो सारे जादा बोलन का काम नहीं से ,
... कुछ लिख्या करो थाम बी अपना नहीं दहिया अपना काम चलारया से [;)] [;)] by amit dahiya
अच्छा सा लगाने लगा है उनका ख्याल मुझे ,
अच्छा सा लगाने लगा है उनका ख्याल मुझे ,
खो न जाऊं यादों में उनकी ए दिल जरा संभाल मुझे
दिखने लगा है उनका ही चेहरा अब रात दिन ,
न आये चैन जरा इक पल भी उनके बिन
ख्यालों से उनके जरा बाहर निकाल मुझे !
मुझको दीवाना ना बनादे कहीं सादगी उनकी
होश ना उड़ा दे कहीं ये बानगी उनकी
सपनो में आक़र भी वो रातों को कर देते है बेहाल मुझे !
हसरत ए दीदार अगर यु बढती ही जाएगी
खुमारी सी दिल में जो चढ़ती ही जाएगी
इक दिन ये दीवानगी कर देगी कंगाल मुझे !
ना ले इन्तिहाँ मेरा की मेरा सपनों का कतल हो जाये
तेरे इन्तजार में सुखा हुआ खेत ,मेरे दिल की फ़सल हो जाये
कहीं इन्तजार करते करते '' नामदेव्'' इरादा बदल हो जाये !
sombirnaamdev@gmail.com
9321083377
खो न जाऊं यादों में उनकी ए दिल जरा संभाल मुझे
दिखने लगा है उनका ही चेहरा अब रात दिन ,
न आये चैन जरा इक पल भी उनके बिन
ख्यालों से उनके जरा बाहर निकाल मुझे !
मुझको दीवाना ना बनादे कहीं सादगी उनकी
होश ना उड़ा दे कहीं ये बानगी उनकी
सपनो में आक़र भी वो रातों को कर देते है बेहाल मुझे !
हसरत ए दीदार अगर यु बढती ही जाएगी
खुमारी सी दिल में जो चढ़ती ही जाएगी
इक दिन ये दीवानगी कर देगी कंगाल मुझे !
ना ले इन्तिहाँ मेरा की मेरा सपनों का कतल हो जाये
तेरे इन्तजार में सुखा हुआ खेत ,मेरे दिल की फ़सल हो जाये
कहीं इन्तजार करते करते '' नामदेव्'' इरादा बदल हो जाये !
sombirnaamdev@gmail.com
9321083377
शुक्रवार, 13 जुलाई 2012
My Dear,With Due Respect I Would Like To Say That
देशी छोरा एक शहरी लड़की से " फ़ोन नंबर देवे सै के? "
लड़की "तमीज़ से बात करो "
छोरा " My Dear,With Due Respect I Would Like To Say That फ़ोन नंबर देवे सै के ?"
लड़की "तमीज़ से बात करो "
छोरा " My Dear,With Due Respect I Would Like To Say That फ़ोन नंबर देवे सै के ?"
के बेरा था
के बेरा था जिन्दगी मन्ने इसे मोड़ पै ले ज्यागी ,
जी तै ज्यादा चाहय था जिसने इक दिन धोखा दे ज्यागी !
जी तै ज्यादा चाहय था जिसने इक दिन धोखा दे ज्यागी !
काळू अर भूंडू नै
काळू अर भूंडू नै घणी दारू पी राखी थी । रात नै साईकल पै बैठ कै कच्चे
रास्ते तैं घरां जावैं थे । काळू साईकल चलावै था अर भूंडू पाछै बैठ्या था ।
भूंडू रास्ते मैं लुढ़क ग्या । काळू नै कोए ध्यान नहीं, मस्ती में झूमता घरां पहुंच्या अर बोल्या - ले भाई उतर, घर आ-ग्या ।
जब पाच्छे तैं कोए जवाब नहीं आया, तै काळू का नशा कुछ ढीला हुया, साईकल ठा कै उल्टा भाज लिया । राह में देख्या - भूंडू मस्ती में चूर राही में लोट रहया था । काळू उसनै देख कै बोल्या - आंह रै, ठीक सै ?
काळू नै जवाब दिया - "मैं ठीक बैठ्या सूँ, तू साईकल चलाता रह !"
भूंडू रास्ते मैं लुढ़क ग्या । काळू नै कोए ध्यान नहीं, मस्ती में झूमता घरां पहुंच्या अर बोल्या - ले भाई उतर, घर आ-ग्या ।
जब पाच्छे तैं कोए जवाब नहीं आया, तै काळू का नशा कुछ ढीला हुया, साईकल ठा कै उल्टा भाज लिया । राह में देख्या - भूंडू मस्ती में चूर राही में लोट रहया था । काळू उसनै देख कै बोल्या - आंह रै, ठीक सै ?
काळू नै जवाब दिया - "मैं ठीक बैठ्या सूँ, तू साईकल चलाता रह !"
गुरुवार, 12 जुलाई 2012
पर लेणी सै खार-की !!
पहली बार ब्याई हुई भैंस को "खार-की" कहा जाता है ।
कई चमार भैंस खरीदने एक गांव में चले गए, उनको एक "तुरत की ब्याई" भैंस की जरूरत थी । एक जगह घणे सारे जाट हुक्का पीवैं थे । एक चौधरी नै बूझ लिया - " रै कित जाओ सो ?"
एक चमार बोला - "चौधळी साब, एक भैंस लेणी सै"
चौधरी - किसी (कैसी) भैंस लोगे ?
चमार - ब्या रही हो चाहे कितनी-ऐं बै, पर लेणी सै खार-की !!
कई चमार भैंस खरीदने एक गांव में चले गए, उनको एक "तुरत की ब्याई" भैंस की जरूरत थी । एक जगह घणे सारे जाट हुक्का पीवैं थे । एक चौधरी नै बूझ लिया - " रै कित जाओ सो ?"
एक चमार बोला - "चौधळी साब, एक भैंस लेणी सै"
चौधरी - किसी (कैसी) भैंस लोगे ?
चमार - ब्या रही हो चाहे कितनी-ऐं बै, पर लेणी सै खार-की !!
जाट नै एक बाणियां तैं पईसे उधार ले राक्खे थे
एक बै एक जाट नै एक बाणियां तैं पईसे उधार ले राक्खे थे । घणे दिन हो-गे, उसतैं पईसे पाट्टे कोनी ।
बाणियां नै गाम कट्ठा कर लिया अर बोल्या - भाइयो, मेरे पईसे का जुगाड़ बिठवाओ । गाम आळे बोले - लाला जी, इसपै घणे पईसे उधार हो-गे, इसतैं सारे पईसे तै दिये नहीं जावैं, आधे पईसे छः महीने में दे देगा ।
बाणियां नै गाम आळां की बात मान ली अर जाट के आधे पईसे माफ कर दिये ।
छः महीने पाच्छै बाणियां जाट तैं फिर कहण लाग्या - भाई, तन्नैं वो पईसे देणे थे ।
जाट बोल्या - देख भाई, घणा तै बोल्लै मन्ना, आधे तै तेरे दे ए दिये - अर बाकी आधे तेरे न्यूं ऐं कदे दे दूंगा !!
बाणियां नै गाम कट्ठा कर लिया अर बोल्या - भाइयो, मेरे पईसे का जुगाड़ बिठवाओ । गाम आळे बोले - लाला जी, इसपै घणे पईसे उधार हो-गे, इसतैं सारे पईसे तै दिये नहीं जावैं, आधे पईसे छः महीने में दे देगा ।
बाणियां नै गाम आळां की बात मान ली अर जाट के आधे पईसे माफ कर दिये ।
छः महीने पाच्छै बाणियां जाट तैं फिर कहण लाग्या - भाई, तन्नैं वो पईसे देणे थे ।
जाट बोल्या - देख भाई, घणा तै बोल्लै मन्ना, आधे तै तेरे दे ए दिये - अर बाकी आधे तेरे न्यूं ऐं कदे दे दूंगा !!
कौन खता होई मेरे तै यो पूछ रह्या सै किसान तन्नै .
कौन खता होई मेरे तै यो पूछ रह्या सै किसान तन्नै .
एक गंठा दो रोटी लिखदी क्यूँ किस्मत मैं भगवान तन्नै !
उठ सबेरे हल जोड़ू मैं पानी तक ना पीना
मरे बरोबर जिन्दगी मेरी के जीने मैं जीना
गर्मी मैं हाल बेहाल मेरा ना सुख्या कदे पसीना
गर्मी सर्दी चौमासे मैं न मिलदा कती आराम मंन्नै
दुनिया का अन्नदाता मैं ,मेरे घर मैं दो दाणे ना
सब नै अपनी चिंता लाग रही कोई मेरा दर्द पिछाने ना
धरती ऊपर सोकें करूँ गुजारा कदे मिले नरम बिछाने ना
सुख का साँस कदे मिलया ना दी पूरी धरती छान मंन्नै
मेरी रुली मुमताज गरीबी मैं कपडे लिरम लीर रहै
सुख की साँस कदे ना आवे दुःख मै हर दम सीर रहै
कोय सुननिया ना म्हारी किस्ते अपनी पीर कहैं
इस जग मै कोय म्हारा तू तो ले प हचान मंन्नै
जितना मोल मंन्नै मिलै फसल का उतना साहुकार मुनाफा खावें सै
ये साहुकार और सरकार मंन्नै लूट लूट के खावें सै
मेरी मेहनत का फायदा तो ये साहूकार उठावें सै
इस साहूकारी और सरकारी नै कर राख्या सै बीरान मंन्नै
बनके बैल कमाया पर मेरे हाथ किम्मै न आया
कुछ साहुकार नै ले लिया कुछ बैंक का ब्याज चुकाया
कददे खड़ी गाल दी फसल खेत मैं कददे पानी बिन सुखाया
नामदेव तन्नै बुझे सै किस दिन आवेगा मेरे ऊपर तरस भगवान् तन्नै
सोमबीर सिंह '' नामदेव ''
sombirnaamdev@gmail.com
sombirnaamdev@yahoo.com
एक गंठा दो रोटी लिखदी क्यूँ किस्मत मैं भगवान तन्नै !
उठ सबेरे हल जोड़ू मैं पानी तक ना पीना
मरे बरोबर जिन्दगी मेरी के जीने मैं जीना
गर्मी मैं हाल बेहाल मेरा ना सुख्या कदे पसीना
गर्मी सर्दी चौमासे मैं न मिलदा कती आराम मंन्नै
दुनिया का अन्नदाता मैं ,मेरे घर मैं दो दाणे ना
सब नै अपनी चिंता लाग रही कोई मेरा दर्द पिछाने ना
धरती ऊपर सोकें करूँ गुजारा कदे मिले नरम बिछाने ना
सुख का साँस कदे मिलया ना दी पूरी धरती छान मंन्नै
मेरी रुली मुमताज गरीबी मैं कपडे लिरम लीर रहै
सुख की साँस कदे ना आवे दुःख मै हर दम सीर रहै
कोय सुननिया ना म्हारी किस्ते अपनी पीर कहैं
इस जग मै कोय म्हारा तू तो ले प हचान मंन्नै
जितना मोल मंन्नै मिलै फसल का उतना साहुकार मुनाफा खावें सै
ये साहुकार और सरकार मंन्नै लूट लूट के खावें सै
मेरी मेहनत का फायदा तो ये साहूकार उठावें सै
इस साहूकारी और सरकारी नै कर राख्या सै बीरान मंन्नै
बनके बैल कमाया पर मेरे हाथ किम्मै न आया
कुछ साहुकार नै ले लिया कुछ बैंक का ब्याज चुकाया
कददे खड़ी गाल दी फसल खेत मैं कददे पानी बिन सुखाया
नामदेव तन्नै बुझे सै किस दिन आवेगा मेरे ऊपर तरस भगवान् तन्नै
सोमबीर सिंह '' नामदेव ''
sombirnaamdev@gmail.com
sombirnaamdev@yahoo.com
हरियाणा की सांस्कृतिक
राम राम भाइयों मैं यहाँ इस पेज हरियाणा की सांस्कृतिक धरोहरों और
ऐतहासिक इमारतों , और मुख्या शहरों के बारे में ज्ञानवर्धक और रोचक जानकारियां पोस्ट करूँगा!
उम्मीद है आप को पसंद आएगी , और साथ में होगा हरयाणवी जोक्स का तड़का
ऐतहासिक इमारतों , और मुख्या शहरों के बारे में ज्ञानवर्धक और रोचक जानकारियां पोस्ट करूँगा!
उम्मीद है आप को पसंद आएगी , और साथ में होगा हरयाणवी जोक्स का तड़का
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