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मंगलवार, 28 फ़रवरी 2012

उदधि बड़ाई कौन है, जगत पियासो जाय ।।

|| 16 ||
धनि रहीम जल पंक को, लघु जिय पियत अघाय ।
उदधि बड़ाई कौन है, जगत पियासो जाय ।।

|| 17 ||
तैं रहीम मन आपुनो, कीन्हो चारु चकोर ।
निसि बासर लाग्यौ रहे, कृष्णचंद्र की ओर ।।

|| 18 ||
रहिमन यहि संसार में, सब सो मिलिए धाइ ।
ना जाने केहि रूप में, नारायण मिलि जाइ ।।

|| 19 ||
दुरदिन परे रहीम कहि, दुरथल जैयत भागि ।
ठाढ़े हूजत घूर पर, जब घर लागति आगि ।।

|| 20 ||
अब रहीम मुसकिल परी, गाढ़े दोऊ काम ।
साँचे ते तो जग नहीं, झूठे मिलैं न राम ।।

यह रहीम जिय सोस ।

|| 11 ||
बसि कुसंग चाहत कुसल, यह रहीम जिय सोस ।
महिमा घटि समुद्र की, रावन बसयौ परोस ।।

|| 12 ||
तरुवर फल नहिं खात है, सरवर पियहि न पान ।
कहि रहीम परकाज हित, संपति सँचहि सुजान ।।

|| 13 ||
रहिमन याचकता गहे, बड़े छोट हवै जात ।
नारायन हूँ को भयौ, बावन अँगुर गात ।।

|| 14 ||
कह रहीम संपति सगे बनत बहुत बहु रीत ।
बिपत-कसौटी जो कसे, तेई साँचे मीत ।।

|| 15 ||
जो बड़ेन को लघु कहे, नहिं रहीम घटि जांहि ।
गिरिधर मुरलीधर कहे, कुछ दुख मानत नांहि ।।

जो रहीम गति दीप की


|| 6 ||
जे अंचल दीपक दुरयौ, हन्यौ सो ताही गात ।
रहिमन असमय के परे, मित्र शत्रु हवै जात ।।

|| 7 ||
जो रहीम गति दीप की, कुल कपूत गति सोय ।
बारे उजियारे लगे, बढ़े अँधेरो होय ।।

|| 8 ||
टूटे सुजन मनाइये, जो टुटे सौ बार ।
रहिमन फिरि-फिरि पोइए, टुटे मुक्ताहार ।।

|| 9 ||
रहिमन देख बड़ेन को, लघु न दीजै डारि ।
जहाँ काम आवे सुई, कहा करै तरवारि ।।

|| 10 ||
बड़े बड़ाई नहिं करैं, बड़े न बोलें बोल ।
रहिमन हिरा कब कहै, लाख टका मेरो मोल ।।

रहीम के दोहे

रहीम के दोहे

|| 1 ||
एकै साधे सब सधैं, सब साधे सब जाय ।
रहिमन मूलहि सींचिबो, फूलै फलै अघाय ।।

|| 2 ||
कह रहीम कैसे निभे, बेर केर का संग ।
यै डोलत रस आपने, उनके फाटत अंग ।।

|| 3 ||
खीरा सिर ते काटिए, मलियत लौन लगाय ।
रहिमन करुए मुखन को, चहियत इहै सजाय ।।

|| 4 ||
छिमा बड़ेन को चाहिए, छोटन को उत्पात ।
का रहीम हरि को घटयौ, जो भृगु मारी लात ।।

|| 5 ||
जे गरीब सो हित करै, धनि रहीम वे लोग ।
कहा सुदामा बापुरो, कृष्ण मिताइ जोग ।।

शनिवार, 25 फ़रवरी 2012

दिल के ख्वाब जाने क्यू अधूरे रह जाते है

दिल के अरमान दिल में रह जाते है
आसिक बेचारे मासूक का हर सितम सह जाते है

उनकी दास्ताँ अ सितम बयां क्या करें
क्यों जख्मो को फिर से क्यू  नया करें
ये सोच कर फिर से चुप चाप से बैठे रह जाते है .

दिल के अरमान दिल में रह जाते है
आसिक बेचारे मासूक का हर सितम सह जाते है
दिल के अरमान दिल में रह जाते है
आसिक बेचारे मासूक का हर सितम सह जाते है

उनकी दास्ताँ अ सितम बयां क्या करें
क्यों जख्मो को फिर से क्यू  नया करें
ये सोच कर फिर से चुप चाप से बैठे रह जाते है .

दिल के अरमान दिल में रह जाते है
आसिक बेचारे मासूक का हर सितम सह जाते है

हर मोड़ पे वो सामने क्यू आ जाते हैं
आँखों में ख्वाब बन  के समां जाते है
बात वो फिर अनकही सी कह जाते है

दिल के अरमान दिल में रह जाते है
आसिक बेचारे मासूक का हर सितम सह जाते है

दिल की तमन्ना  दिलबर को कैसे बयां करे
 दिल की चाहत को कैसे पूरा करे
दिल के ख्वाब जाने क्यू अधूरे रह जाते है

दिल के अरमान दिल में रह जाते है
आसिक बेचारे मासूक का हर सितम सह जाते है

शुक्रवार, 24 फ़रवरी 2012

रहिमन वे नर मर गये, जे कछु माँगन जाहि।
उनते पहिले वे मुये, जिन मुख निकसत नाहि॥
रहिमन विपदा ही भली, जो थोरे दिन होय।
हित अनहित या जगत में, जानि परत सब कोय॥
बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।
पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर॥
रहिमन चुप हो बैठिये, देखि दिनन के फेर।
जब नीके दिन आइहैं, बनत न लगिहैं देर॥
बानी ऐसी बोलिये, मन का आपा खोय।
औरन को सीतल करै, आपहु सीतल होय॥
मन मोती अरु दूध रस, इनकी सहज सुभाय।
फट जाये तो ना मिले, कोटिन करो उपाय॥
वे रहीम नर धन्य हैं, पर उपकारी अंग।
बाँटनवारे को लगै, ज्यौं मेंहदी को रंग॥
रहिमह ओछे नरन सो, बैर भली ना प्रीत।
काटे चाटे स्वान के, दोउ भाँति विपरीत॥
रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय।
टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गाँठ परि जाय॥
रहिमन पानी राखिये, बिन पानी सब सून।
पानी गये न ऊबरे, मोती, मानुष, चून॥
टूटे सुजन मनाइए, जो टूटे सौ बार। 
रहिमन फिरि फिरि पोहिए, टूटे मुक्ताहार॥
बिगरी बात बने नहीं, लाख करो किन कोय।
रहिमन बिगरे दूध को, मथे न माखन होय॥
आब गई आदर गया, नैनन गया सनेहि।
ये तीनों तब ही गये, जबहि कहा कछु देहि॥
चाह गई चिंता मिटी, मनुआ बेपरवाह।
जिनको कछु नहि चाहिये, वे साहन के साह॥
रहिमन देख बड़ेन को, लघु न दीजिये डारि।
जहाँ काम आवै सुई, कहा करै तलवारि॥
माली आवत देख के, कलियन करे पुकारि।
फूले फूले चुनि लिये, कालि हमारी बारि॥

तरुवर फल नहिं खात है,

तरुवर फल नहिं खात है, सरवर पियहि न पान।
कहि रहीम पर काज हित, संपति सँचहि सुजान॥
खीरा को मुंह काटि के, मलियत लोन लगाय। 
रहिमन करुए मुखन को, चहियत इहै सजाय॥
जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करि सकत कुसंग। 
चन्दन विष व्यापत नहीं, लपटे रहत भुजंग॥
जे गरीब सों हित करै, धनि रहीम वे लोग। 
कहा सुदामा बापुरो, कृष्ण मिताई जोग॥
जो बड़ेन को लघु कहे, नहिं रहीम घटि जांहि। 
गिरिधर मुरलीधर कहे, कछु दुख मानत नांहि॥
खैर, खून, खाँसी, खुसी, बैर, प्रीति, मदपान।
रहिमन दाबे न दबै, जानत सकल जहान॥

एकै साधे सब सधै, सब साधे सब जाय।

एकै साधे सब सधै, सब साधे सब जाय। 
रहिमन मूलहिं सींचिबो, फूलै फलै अगाय॥
देनहार कोउ और है, भेजत सो दिन रैन। 
लोग भरम हम पै धरैं, याते नीचे नैन॥
अब रहीम मुसकिल परी, गाढ़े दोऊ काम। 
सांचे से तो जग नहीं, झूठे मिलैं न राम॥
गरज आपनी आप सों रहिमन कहीं न जाया।
जैसे कुल की कुल वधू पर घर जात लजाया॥
छमा बड़न को चाहिये, छोटन को उत्पात।
कह ‘रहीम’ हरि का घट्यौ, जो भृगु मारी लात॥

दिल के ख्वाब जाने क्यू अधूरे रह जाते है

दिल के अरमान दिल में रह जाते है
आसिक बेचारे मासूक का हर सितम सह जाते है

उनकी दास्ताँ अ सितम बयां क्या करें
क्यों जख्मो को फिर से क्यू  नया करें
ये सोच कर फिर से चुप चाप से बैठे रह जाते है .

दिल के अरमान दिल में रह जाते है
आसिक बेचारे मासूक का हर सितम सह जाते है

हर मोड़ पे वो सामने क्यू आ जाते हैं
आँखों में ख्वाब बन  के समां जाते है
बात वो फिर अनकही सी कह जाते है

दिल के अरमान दिल में रह जाते है
आसिक बेचारे मासूक का हर सितम सह जाते है

दिल की तमन्ना  दिलबर को कैसे बयां करे
 दिल की चाहत को कैसे पूरा करे
दिल के ख्वाब जाने क्यू अधूरे रह जाते है

दिल के अरमान दिल में रह जाते है
आसिक बेचारे मासूक का हर सितम सह जाते है

गुरुवार, 23 फ़रवरी 2012

आज सचिन के खिलाफ हर तरफ से आवाज उठ रही है .
लेकिन जरा सोचिये सचिन ने भारतीये क्रिकेट को क्या नहीं दिया
याद कीजिये उन दिनों को जब टीम इकलोते batsman  होते जो मैच जीताते थे .
उनके   आउट होते ही लोग टीवी बंद कर देते थे आज वो वहल नहीं रहे
 तो क्या हुआ उनका अनुभव टीम के साथ है जो टीम के काम आयेगा
वो क्या करना चाहते है ये उनपर छोड़कर आलोचना करनी बंद कीजिये 

बुधवार, 22 फ़रवरी 2012

ऐ दिल ऐ नादाँ बता तेरी रजा क्या है

ऐ दिल ऐ नादाँ बता तेरी रजा क्या है
दिल तोड़ ने वालों की सजा क्या है ,
जो जिन्दगी भर तडपता छोड़ गए .
एक पल में वादा ऐ वफ़ा तोड़ गए ..
खुद से जो निभा न पाए
उन की तेरे साथ वफ़ा क्या है
ऐ दिल ऐ नादाँ बता तेरी रजा क्या है
दिल तोड़ ने वालों की सजा क्या है ,
जिन्दगी भर साथ चलने का वादा कर गए .
जरा सा तूफ़ान देख के डर गए ..
ऐसे बेवफा संगदिल महबूब में
बता रखा क्या है
ऐ दिल ऐ नादाँ बता तेरी रजा क्या है
दिल तोड़ ने वालों की सजा क्या है ,
सोचा क्या था क्या हो गया
वो जालिम जाने किसके सपनों में खो गया
भूल जा उस रिश्ते को
उस रिसते में बाकी बचा क्या है
ऐ दिल ऐ नादाँ बता तेरी रजा क्या है
दिल तोड़ ने वालों की सजा क्या है ,

शनिवार, 18 फ़रवरी 2012

वो वफ़ा न सके

वो वफ़ा न सके उनकी कोई मजबूरी होगी .
अपनी हालत क्या होगी छोडिये उनकी तो हसरत पूरी होगी

गुरुवार, 16 फ़रवरी 2012

इन्जार लम्बा हो गया

दर्द को हम दवा बनाकर पी ते चले गए
उनकी आने के इन्तजार में जीते चले गए
इन्जार लम्बा हो गया इतना के मरना मुश्किल हो गया हमारा
और ना हम जीने के काबिल रहे

दिल ही दिल

दिल ही दिल हम उनको चाहते रहे
बात अपने मन की छुपाते रहे ,
जुदाई के भवर में फस कर हाल वो हमारा हुआ
न इधर के रहे न उधर के रहे

सोमवार, 13 फ़रवरी 2012

एक तेरी दीवानगी जो मेरे दिल पे छाई है

एक तेरी दीवानगी जो मेरे दिल पे छाई है
यादों इक घटा उमड़ कर दिल आसमान पर आयी है
यादों के बादल जब भी मेरे दिल छाएंगे
मेरे महबूब तेरा चेहरा ही आँखों के सामने पाएंगे
मेरी ये आँखें तेरे उस मासूम से चेहरे को न कभी भूल पायी है
यादों इक घटा उमड़ कर दिल आसमान पर आयी है
एक तेरी दीवानगी जो मेरी दिल पे छाई है
दीवाने पन हम उनको ढूढ़ते रहे
वो गैरों की आंधी में बह गए
फिर जाने क्यू लगता है के वो आज हमसे मिलने को आयी है
यादों इक घटा उमड़ कर दिल आसमान पर आयी है
एक तेरी दीवानगी जो मेरी दिल पे छाई है

शुक्रवार, 10 फ़रवरी 2012

दीवाने की बस्ती

दीवाने की बस्ती में हर तरफ तन्हाई सी छायी है
मासूक के घर पे आज बारात जो आयी है
तारों का हाल क्या होगा जब चाँद ने चमकना  छोड़ दिया ,
शराब का हाल क्या होगा जब शराबी ने पीना छोड़ दिया ..
मासूक का हाल क्या होगा जब आशिकों नेबहलना छोड़ दिया

काश खुदा ने हुस्न वालों अहसास ए दर्द दिया होता .

काश खुदा ने हुस्न वालों अहसास ए दर्द दिया होता .
हो सकता था जालिम ने अपने से दूर न किया होता
हुस्न की अदाएं दिखाकर
मासूम दिल को अपने जाल में फंसाकर
नज़रों के फिर तीर चलाकर
दिल से दिल लगाकर फिर झट से दूर न किया होता
काश खुदा ने हुस्न वालों अहसास ए दर्द दिया होता
बाँहों की फिर पिंग झुलाकर
नए नए वो ख्वाब दिखाकर
सपनों की फिर सेज सजाकर
मीठी मीठी नींद में सुलाकर अचानक से फिर न जगा जगा दिया
काश खुदा ने हुस्न वालों अहसास ए दर्द दिया होता .


सोमबीर सिंह सरोया