पहली बार ब्याई हुई भैंस को "खार-की" कहा जाता है ।
कई चमार भैंस खरीदने एक गांव में चले गए, उनको एक "तुरत की ब्याई" भैंस की जरूरत थी । एक जगह घणे सारे जाट हुक्का पीवैं थे । एक चौधरी नै बूझ लिया - " रै कित जाओ सो ?"
एक चमार बोला - "चौधळी साब, एक भैंस लेणी सै"
चौधरी - किसी (कैसी) भैंस लोगे ?
चमार - ब्या रही हो चाहे कितनी-ऐं बै, पर लेणी सै खार-की !!
कई चमार भैंस खरीदने एक गांव में चले गए, उनको एक "तुरत की ब्याई" भैंस की जरूरत थी । एक जगह घणे सारे जाट हुक्का पीवैं थे । एक चौधरी नै बूझ लिया - " रै कित जाओ सो ?"
एक चमार बोला - "चौधळी साब, एक भैंस लेणी सै"
चौधरी - किसी (कैसी) भैंस लोगे ?
चमार - ब्या रही हो चाहे कितनी-ऐं बै, पर लेणी सै खार-की !!
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