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गुरुवार, 12 जुलाई 2012

पर लेणी सै खार-की !!

पहली बार ब्याई हुई भैंस को "खार-की" कहा जाता है ।

कई चमार भैंस खरीदने एक गांव में चले गए, उनको एक "तुरत की ब्याई" भैंस की जरूरत थी । एक जगह घणे सारे जाट हुक्का पीवैं थे । एक चौधरी नै बूझ लिया - " रै कित जाओ सो ?"

एक चमार बोला - "चौधळी साब, एक भैंस लेणी सै"

चौधरी - किसी (कैसी) भैंस लोगे ?

चमार - ब्या रही हो चाहे कितनी-ऐं बै, पर लेणी सै खार-की !!

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