रूबरू
पृष्ठ
Home
सोमवार, 18 मार्च 2013
मतना छेड़े यार मेरे
तू के जाने आग मैं दिल मैं कोण दबाये बैठ्या सु
मतना छेड़े यार मेरे चोट मैं दिल पे खाए बैठ्या सु
नामदेव
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें