तरुवर फल नहिं खात है, सरवर पियहि न पान।
कहि रहीम पर काज हित, संपति सँचहि सुजान॥
कहि रहीम पर काज हित, संपति सँचहि सुजान॥
खीरा को मुंह काटि के, मलियत लोन लगाय।
रहिमन करुए मुखन को, चहियत इहै सजाय॥
रहिमन करुए मुखन को, चहियत इहै सजाय॥
जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करि सकत कुसंग।
चन्दन विष व्यापत नहीं, लपटे रहत भुजंग॥
चन्दन विष व्यापत नहीं, लपटे रहत भुजंग॥
जे गरीब सों हित करै, धनि रहीम वे लोग।
कहा सुदामा बापुरो, कृष्ण मिताई जोग॥
कहा सुदामा बापुरो, कृष्ण मिताई जोग॥
जो बड़ेन को लघु कहे, नहिं रहीम घटि जांहि।
गिरिधर मुरलीधर कहे, कछु दुख मानत नांहि॥
गिरिधर मुरलीधर कहे, कछु दुख मानत नांहि॥
खैर, खून, खाँसी, खुसी, बैर, प्रीति, मदपान।
रहिमन दाबे न दबै, जानत सकल जहान॥
रहिमन दाबे न दबै, जानत सकल जहान॥
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