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शुक्रवार, 5 अप्रैल 2013

क्यों आज फेर तेरी घनी गाढ़ी कमी सी लागे सै

क्यों आज फेर तेरी घनी गाढ़ी कमी सी लागे सै
के होगीआज मेरे तै खता बता दे जो परे परे सी भागे सै!

कड़े गये वे तेरे वादे और इरादे जो सारी हान तू कह्या करती
इक घडी ना दूर बिछड़ के तू मेरे तै एक पल दूर रह्या करती
मन्ने बता दे इब छोरी जी तेरा यो मेरे बिना क्यूकर लागे सै !

आज इसा के होग्या जो तन्ने फूटी आँख सुहाता ना
मेरी हालत देख के बैरन तन्ने क्यूँ रहम मेरे पै आता ना
दरदां आले गोले बता मेरे पै इब क्यूँ और घने तू दागे सै !

सारा खोट मेरा लागे ना यार की करी पिछान मन्ने
बेकदरां के गैल लाग के करली जिन्दगी कति बीरान मन्ने
जिन्दगी बीरान होए पाछे के फायदा जो '''डायेआला '''इब तू जागे सै

sombir ''naamdev''

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