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शनिवार, 14 अप्रैल 2012

माँ की ममता और फर्ज बाप का
दुनिया में सब पे भारी है
बेटी नाम दुलार का है
नाम समर्पण का नारी है

भाई सा सच्चा साथी दुनिया में कोई और नहीं .
सच्चे यार की वफ़ा जैसा दुनिया में कोई और नहीं ..
बहन है सच्ची रक्षक दुःख सुख की संगी है

दादा परिवार की नीव जिस पर परिवार की ईमारत खड़ी है
दादी ठंडी छाव् बनके सर के ऊपर छत सी पड़ी है
ये दोनों है आने वाले कल प्रेरणा
बिना इनके जिन्दगी बे रंगी है

बेटे है जमा पूंजी जो काम वक़्त पे आये
जवानी का गौरव है बेटे और बुढ़ापे की लाठी है
बिना बेटे के बाप की जिंदगी ही बे ढंगी है

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