बात पते की मैं आज बोल के रहूँगा ..
ना मानु आज कालजा छोल के रहूंगा
क्यू माँ का मान रह्या ना
क्यू बाप का मानै कह्या ना
ना रहूँ अनबोल बोल के रहूँगा !
क्यू भाई चारा रह्या ना
क्यू जाता बोल सह्या ना
सही तराजू तौल के रहूँगा !
क्यू यारां बरगा यार ना रह्या
क्यू कोए दुःख बिगाने का साथी ना रह्या
भीतरले नै आज टटोल के रहूंगा !
क्यू पहले बरगा पंचाती ना रह्या
क्यू गरीब का कोई हिमाती ना रह्या
भेद सारे दिल के "नामदेव 'तै खोल के कहुंगा !
लेखक = सोमबीर सिंह सरोया
गाँव डाया जिला हिस्सार ( हरियाणा )
मोबाइल नंबर :-9321083377
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