भाइयो जब एक फौजी अपनी नयी नवेली ब्याहता को घर पर छोड़ कर बोर्डर पर लडाई के लिए जाता है ,
उन दोनों में क्या संवाद होते उसको महसूस करने और लिखने कोशिश की है !
अगर कोई गलती रह जाये तो अपना भाई अपना बच्चा समझ कर माफ़ कर दें !
क्यूंकि इस मौके तो बहूत बड़े बड़े हरयाणा के कवियों ने कलम चलाई है,
मैं तो उनके आगे कुछ भी नहीं हूँ !
फौजी -" आया बुलावा मेरा गोरी मैं बोर्डर उपर चाल पड्या ,
फौजन-" क्यूकर तै मैं रंहू एकली न्यू सौच कालजा हाल पड्या !
फौजी -" गोरी बोडर उपर छिडरी जंग मेरा जाना बहूत जरूरी सै
अपने इस देश की रक्षा खातिर करनी मने पड़े हजूरी सै ,
तेरे बिना या गोंरी जिन्दगी मेरी अधूरी सै
जाण की सुनके गोंरी आज मेरे कालजे के माह साल पड्या !
फौजन-" काली लम्बी रात पिया मन्ने पड़े बैठके काटनी .
दिनरात पिया तेरे सुपने देखे जासे तेरी जाटनी .
आर मद जोबन की झाल पिया मुश्किल पड़े डाटनी .
किस्ती कहूँ दिल अपने की तू तै छोड़ एकली चाल पड्या !
फौजी -" दिल अपने नै समझाके गोरी मन अपने नै मार लिए .
देश की रक्षा करनी मने तू मेरे बिना ए सार लिए .
करड़ी छाती करके नै मन्ने जाणे नै कर तयार दिए .
देश की सेवा खातिर फौजी करके होग्या ख्याल खडया !
फौजन-" जा बोर्डर उपर मेरे पिया तू दुश्मन तै भीड़ जाइये .
जान चली बेशक तै ना उलटा कदम हटाइए .
'' सोमबीर नामदेव ''तू जिन्दगी अपनी नाम देश के लिख जाइये
(singer name ) भी इब बोर्डर उपर जाणे नै होके त्यार खड्या !
सोमबीर सिंह सरोया "नामदेव "
गाँव डाया जिला हिस्सार हरियाणा
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